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आलेख : मिथिलाक आर्थिक दशा आ संभावना

तीन कातसँ तीन गोट महान नदीसँ (पूबमे कोसी, दक्षिणमे गंगा आ पश्चिममे गंडक) घिरल आ दू टा अन्तराष्ट्रीय सीमासँ (नेपाल आ बांग्लादेश) सटल मिथिलाक अपन विशिष्ट भौगौलिक, राजनीतिक आ आर्थिक महत्व अछि। खेती, माल-जाल पोसनाय आ माछ-पालन मिथिलाक प्रमुख आर्थिक गतिविधि अछि आ एहि क्षेत्रक लोकक लेल जीविकाक मुख्य साधन सेहो।धान, गहूम, दलहन, तेलहन, मकईक अलावा बांस, जूट, आम, लीची, केरा आ मखान मिथिलाक प्रमुख कृषि उत्पाद अछि। एकर अलावा मिरचाय, धनि, हरदि, आद, पान आ तमाकुल सन नगदी फसलक उत्पादन सेहो होएत अछि। उपजाऊ माटि आ पानिक प्रचूरता रहलाक उपरान्तो मिथिलामे खेतीक स्थिति दयनीय अछि। क्षेत्रमे खेती मूलतः बरखाक पानि पर निर्भर रहैत अछि। मिथिलामे बाढ़ि आ रौदी दुनूक प्रकोप देखल जाएत अछि। कोनो क्षेत्रमे नियमित रूपें एहि दुनु प्रकोपक एक संगे बनल रहब प्राकृतिक आपदासँ बेशी भौतिक अक्षमता आ उदासीनताक संकेतक अछि। बाढ़ि, बरखा आ भूमिगत पानिक संरक्षित क' रउदिक समयमे विभिन्न माध्यमे एकर सदुपयोग कएल जा सकैछ। पानिक समुचित प्रबंधनसँ मात्र रौदी आ दाहीक समस्याक समाधाने टा हएत से नै अपितु एकरा संगे-संग विद्दुत उत्पादन आ उद्योगक स

गप कने हटि क'-१

आजुक समयमे युवा वर्गक व्यवहार आ संस्कारमे बहुत परिवर्तन आएल अछि। पाश्चात्य सभ्यताक करिया छाँह मैथिलक कर्मठ वर्तमान आ धवल भविष्य दुनुकें प्रभावित केलक अछि। आब बेसीतर युवा आ युवती बस अपने धरि सकुचल छथि। नीक डिग्री, नीक नौकरी, खूब रास आमद, पैघ सन कोठी, नमहर (चरिचकिया) गाड़ी, एकटा जीवन-संगी/संगिनी आ बहुत रास आधुनिक सुख-सुविधा; [upme_private]Place member only content here[/upme_private]बस एतबे धरि हुनका लोकनिक जिनगी सिमटल छनि। आ तकर कारणो अछि, ओ लोकनि अपन अतीत बिसरि आ भविष्यसँ अनवगत अपन आइमे जीवैत छथि। कोन बाट चलि एतए तक आएल छलाह आ अपना पाछा की छोड़ि क' जेता तकर कोनो फिकिर नै। समाज या सामाजिक गतिविधि सभसँ हिनका लोकनिकें कोनो लेना-देना नै। बस घरसँ-कार्यालय आ कार्यालयसँ-घर, एतबहिमे जीवन खतम। हाँ, एकटा गप्प त' छुटिए गेल - चाहे कतबो व्यस्त दिनचर्या होइन्ह, टाकाक कतबो तंगी होइन्ह, माए-बापक लेल समय आ टाका होइन्ह वा की नै होइन्ह मुदा सिनेमा-सर्कस, प्रीतिभोज (पार्टी) आ बाजार (माँल) घुमबा लेल समय आ टाका दुनुक ब्योंत कए लैत छथि। ऐ मामलामे ओ सभ बड्ड जोगारू आ बड्ड सचेत रहैत छथि। बस एक्के टा चि