आलेख : मिथिलाक आर्थिक दशा आ संभावना
तीन कातसँ तीन गोट महान नदीसँ (पूबमे कोसी, दक्षिणमे गंगा आ पश्चिममे गंडक) घिरल आ दू टा अन्तराष्ट्रीय सीमासँ (नेपाल आ बांग्लादेश) सटल मिथिलाक अपन विशिष्ट भौगौलिक, राजनीतिक आ आर्थिक महत्व अछि। खेती, माल-जाल पोसनाय आ माछ-पालन मिथिलाक प्रमुख आर्थिक गतिविधि अछि आ एहि क्षेत्रक लोकक लेल जीविकाक मुख्य साधन सेहो।धान, गहूम, दलहन, तेलहन, मकईक अलावा बांस, जूट, आम, लीची, केरा आ मखान मिथिलाक प्रमुख कृषि उत्पाद अछि। एकर अलावा मिरचाय, धनि, हरदि, आद, पान आ तमाकुल सन नगदी फसलक उत्पादन सेहो होएत अछि। उपजाऊ माटि आ पानिक प्रचूरता रहलाक उपरान्तो मिथिलामे खेतीक स्थिति दयनीय अछि। क्षेत्रमे खेती मूलतः बरखाक पानि पर निर्भर रहैत अछि। मिथिलामे बाढ़ि आ रौदी दुनूक प्रकोप देखल जाएत अछि। कोनो क्षेत्रमे नियमित रूपें एहि दुनु प्रकोपक एक संगे बनल रहब प्राकृतिक आपदासँ बेशी भौतिक अक्षमता आ उदासीनताक संकेतक अछि। बाढ़ि, बरखा आ भूमिगत पानिक संरक्षित क' रउदिक समयमे विभिन्न माध्यमे एकर सदुपयोग कएल जा सकैछ। पानिक समुचित प्रबंधनसँ मात्र रौदी आ दाहीक समस्याक समाधाने टा हएत से नै अपितु एकरा संगे-संग विद्दुत उत्पादन आ उद्योगक स