बाल कविता-२ : बनि हमजोली खेलै छी !!
धिया पुता हम सभ बुधियार
अपनामे अछि खूब दुलार
चल गै बहिना, चल रौ यार
बँटि-बँटि टोली, खेलै छी
बनि हमजोली खेलै छी।
दूभि छै पसरल हरियर-हरियर
तकरा बीचमे माटि जे उज्जर
तए पर घुच्ची खूनि गहिंरगर
चल ने गोली खेलै छी
बनि हमजोली खेलै छी।
गोहिया-पोखरि राजा-पक्की
गिल्ली-डंटा चैत-कबड्डी
कखनो कितकित धप्पो-गोटी
आंखि-मिचौली खेलै छी
बनि हमजोली खेलै छी।
बीतल बसंत एलए फगुआ
खूब कचरबै मिठगर पुआ
चल सभ रंग अबीर ल' आ
भरि टोलमे होली खेलै छी
बनि हमजोली खेलै छी।
बोल ओल सन कबकब नै
जाति-पातिसँ मतलब नै
अपनामे किन्नहुँ झगड़ब नै
मिलि पूरा टोली खेलै छी
बनि हमजोली खेलै छी !!
(तिथि-०७.०३.२०१३)
©पंकज चौधरी (नवलश्री)
अपनामे अछि खूब दुलार
चल गै बहिना, चल रौ यार
बँटि-बँटि टोली, खेलै छी
बनि हमजोली खेलै छी।
दूभि छै पसरल हरियर-हरियर
तकरा बीचमे माटि जे उज्जर
तए पर घुच्ची खूनि गहिंरगर
चल ने गोली खेलै छी
बनि हमजोली खेलै छी।
गोहिया-पोखरि राजा-पक्की
गिल्ली-डंटा चैत-कबड्डी
कखनो कितकित धप्पो-गोटी
आंखि-मिचौली खेलै छी
बनि हमजोली खेलै छी।
बीतल बसंत एलए फगुआ
खूब कचरबै मिठगर पुआ
चल सभ रंग अबीर ल' आ
भरि टोलमे होली खेलै छी
बनि हमजोली खेलै छी।
बोल ओल सन कबकब नै
जाति-पातिसँ मतलब नै
अपनामे किन्नहुँ झगड़ब नै
मिलि पूरा टोली खेलै छी
बनि हमजोली खेलै छी !!
(तिथि-०७.०३.२०१३)
©पंकज चौधरी (नवलश्री)
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