कविता-९ : हमर अस्तित्व !!

हम गरदा नै छी बाटक जे
बसातक बाट जोहब हम
आ जेमहर-जेमहर ओ बहत
हमहूँ बहैत चलि जाएब

हम बसात छी बिहारि छी
निज बाट हम बहैत रहब
अप्पन दिशा अप्पन दशा
अपने नियारब अपने बनाएब

हमर बाटकें जँ कियो कतहु
बनि अवरोधक रोकत त'
ओ बहि हमर प्रभावसँ
उधिया जेतए हेरा जेतए

(तिथि-२०.०२.२०१३)
©पंकज चौधरी "नवलश्री"

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