कविता-१० : व्यवस्था !!

एमहर गेंटल ओमहर गेंटल
जेमहर देखू तेमहर गेंटल
छोटका परमे नमहर गेंटल
के जानए की केमहर गेंटल
गेंट-गेंट चकराबय माथा
एहन व्यवस्थित गेंटा-गेंटी !

नवकामे छै पुरना फेंटल
अरबामे छै उसना फेंटल
जे फेंटए तकरो नै बूझल
कथीमे गेलै ककरा फेंटल
सभ मिझरेलै मूल कथू नै
एहन चमत्कृत फेंटा-फेंटी !

(तिथि-२४.०२.२०१३)
©पंकज चौधरी (नवलश्री)

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