किछु शब्द गजलक मादे
की होइत अछि गजल ?
कविता आ गीत जकाँ “गजल” सेहो साहित्यक एकटा स्वतंत्र विधा थिक। जेना कवितामे भावक प्राथमिकता होइत अछि आ गीतमे सुर-तालके तहिना गजलमे भाव संगे-संग एकटा निश्चित संरचनाक/ढांचाक अनुपालन सेहो करब आवश्यक होइछ। आ से जँ नहि होए त' गजल आ कविता/गीतमे कोनो अंतर नै। मने भाव त' रहब आवश्यक अछिए मुदा गजलमे रचनाक संरचना/ढांचा केर बेशी महत्व अछि। जँ भाव गजलक सृजनक आधार थिक त' छन्दक अनुपालनसँ ओकर यथोचित श्रृंगार होएत अछि।
विदेह, अनचिन्हार आखर आ आनोआन श्रोतसँ बहुतो गोटे गजल आ गजलक व्याकरणसँ परिचित हएब आ जे परिचित नहि छी आउ तिनका सभके गजल विधामे प्रयुक्त होमय वला किछु विशिष्ट शब्द सभसँ परिचय करा दी...
शेर:- शेर दू पांतिक ओ शब्द संयोजन या संरचना थिक जाहिसँ पूर्ण भाव अभिव्यक्त होइछ। एकटा आदर्श गजलमे कमसँ कम पांच गोट शेर होमक चाही।
मतला:- कोनो गजलक पहिल शेरकें ओहि गजलक मतला कहल जाएत अछि।
> गजलमे मतला वला शेरक बड्ड महत्व छैक। अही शेरसँ गजलक रदीफ आ कफियाक निर्धारण होएत छै। आ तदुपरांत ओहि गजलक बांकी सभ शेरक दोसर पांतिमे एकर अनुपालन करब आवश्यक रहैत अछि।
रदीफ:- मतला वला शेरक दुनु पांतिमे अंतसँ शब्दक जे समूह एक रंग होएत अछि तकरा रदीफ़ कहल जाइछ।
ई शेर देखू -
कतबो सुख सुविधा बाहर भेटत
अपनैती धरि अपने घर भेटत
शेरके अंतसँ देखू - "भेटत" शब्द दुनु पांतिमे आएल अछि, त' ई भेल एहि गजलक रदीफ।
काफिया:- मतला वला शेरक दुनु पांतिमे वर्ण या मात्राक साम्यकें काफिया कहल जाइछ।
उपरका शेरकें एक बेर फेरसँ देखू - रदीफ "भेटत"सँ ठीक पहिले क्रमशः "बाहर" आ "घर" शब्द आएल अछि। ऐ दुनु शब्दमे "र" वर्ण आ ताहिसँ पहिले "अ" मात्रा आएल अछि मने "अर" तुकांत समान अछि। त' ई भेल एहि गजलक काफिया।
> काफिया छंदबद्ध गजलक आत्मा होइत अछि। एकरा एना बूझि सकैत छी जे बिना रदीफक गजल त' भ' सकैत अछि मुदा बिना कफियाक गजल संभव नहि। ओना बिना रदीफक गजल बेसी प्रचलित नै अछि मुदा एहन गजलकें "गैर-मुरद्दफ" गजल कहल जाइछ।
मकता:- गजलक अंतिम शेरकें मकता कहल जाएत अछि। ऐ अंतिम शेरमे (शेरक दुनु मेंसँ कोनो एकटा पांतिमे) गजलकार द्वारा अपन नाम/उपनाम प्रयोग करबाक प्रचलन अछि जे सभ गजलमे एक रहबाक चाही (मने फराक-फराक गजलमे नाम/उपनामक अदला-बदली नै करक चाही)
बहर:- बहर एकटा निश्चित वर्ण-क्रम होइत अछि। कोनो गजलक सभ शेरमे कोनो निश्चित वर्ण-क्रमक अनुपालनकें बहरयुक्त गजल कहल जाइत अछि।
मैथिलीमे बहर दू तरहक होइछ-
क) वर्णक आधार पर - सरल वार्णिक आ वार्णिक
ख) मात्राक आधार पर - मात्रिक
>"अनचिन्हार आखर" आ "विदेह"क माध्यमे मैथिली गजलमे "अरबी बहर"क सफलतापूर्वक आ चिक्कन प्रयोग भ' रहल अछि।
गजलक अलग-अलग बहर अछि जाहिमेसँ अरबी बहरके अंतर्राष्ट्रीय मानक मानल गेल अछि।
अरबीबहरमे बहरक तीन कोटि होइत अछि-
क) सामान
ख) अर्द्धसमान
ग) असमान
> आउ जानी अरबी बहरक एहि तीनू भेदक अलग-अलग उपभेद आ ओकर संरचना (मात्राक्रम)
क) समान बहर:-
१) बहरे हजज - १२२२
२) बहरे रमल - २१२२
३) बहरे कामिल - ११२१२
४) बहरे मुतकारिब - १२२
५) बहरे मुतदारिक - २१२
६) बहरे रजज - २२१२
७) बहरे वाफिर - १२११२
ख) अर्द्ध समान बहर:-
१) बहरे तवील - १२२+१२२२
२) बहरे मदीद - २१२२+२१२
३) बहरे बसीत - २२१२+२१२
४) बहरे मुजस्सम/मुजास - २२१२+२१२२
५) बहरे मुन्सरह - २२१२+२२२१
६) बहरे मजरिअ - १२२२+२१२२
७) बहरे मुक्तबिज - २२२१+२२१२
ग) असमान बहर:-
१) बहरे - २१२२+२२१२+२१२२
२) बहरे - २१२२+२१२२+२२१२
३) बहरे सरीअ - २२१२+२२१२+२१२२
४) बहरे करीब - १२२२+१२२२+२१२२
५) बहरे मुशाकिल - २१२२+१२२२+१२२२
६) बहरे कलीब - २१२२+२१२२+१२२२
७) बहरे असम - २१२२+१२२२+२१२२
८) बहरे कबीर - २२२१+२२२१+२२१२
९) बहरे सगीर - २२१२+२१२२+२२१२
१०) बहरे सरीम - १२२२+२१२२+२१२२
११) बहरे सलीम - २२१२+२२२१+२२२१
१२) बहरे हमीद - २२२१+२२१२+२२२१
१३) बहरे हमीम - २१२२+२२१२+२२१२
=> गजलक व्याकरणसँ सम्बंधित सम्पूर्ण आलेख पढ़बा लेल ऐ ठाम जाऊ - http://anchinharakharkolkata.blogspot.in/
कविता आ गीत जकाँ “गजल” सेहो साहित्यक एकटा स्वतंत्र विधा थिक। जेना कवितामे भावक प्राथमिकता होइत अछि आ गीतमे सुर-तालके तहिना गजलमे भाव संगे-संग एकटा निश्चित संरचनाक/ढांचाक अनुपालन सेहो करब आवश्यक होइछ। आ से जँ नहि होए त' गजल आ कविता/गीतमे कोनो अंतर नै। मने भाव त' रहब आवश्यक अछिए मुदा गजलमे रचनाक संरचना/ढांचा केर बेशी महत्व अछि। जँ भाव गजलक सृजनक आधार थिक त' छन्दक अनुपालनसँ ओकर यथोचित श्रृंगार होएत अछि।
विदेह, अनचिन्हार आखर आ आनोआन श्रोतसँ बहुतो गोटे गजल आ गजलक व्याकरणसँ परिचित हएब आ जे परिचित नहि छी आउ तिनका सभके गजल विधामे प्रयुक्त होमय वला किछु विशिष्ट शब्द सभसँ परिचय करा दी...
शेर:- शेर दू पांतिक ओ शब्द संयोजन या संरचना थिक जाहिसँ पूर्ण भाव अभिव्यक्त होइछ। एकटा आदर्श गजलमे कमसँ कम पांच गोट शेर होमक चाही।
मतला:- कोनो गजलक पहिल शेरकें ओहि गजलक मतला कहल जाएत अछि।
> गजलमे मतला वला शेरक बड्ड महत्व छैक। अही शेरसँ गजलक रदीफ आ कफियाक निर्धारण होएत छै। आ तदुपरांत ओहि गजलक बांकी सभ शेरक दोसर पांतिमे एकर अनुपालन करब आवश्यक रहैत अछि।
रदीफ:- मतला वला शेरक दुनु पांतिमे अंतसँ शब्दक जे समूह एक रंग होएत अछि तकरा रदीफ़ कहल जाइछ।
ई शेर देखू -
कतबो सुख सुविधा बाहर भेटत
अपनैती धरि अपने घर भेटत
शेरके अंतसँ देखू - "भेटत" शब्द दुनु पांतिमे आएल अछि, त' ई भेल एहि गजलक रदीफ।
काफिया:- मतला वला शेरक दुनु पांतिमे वर्ण या मात्राक साम्यकें काफिया कहल जाइछ।
उपरका शेरकें एक बेर फेरसँ देखू - रदीफ "भेटत"सँ ठीक पहिले क्रमशः "बाहर" आ "घर" शब्द आएल अछि। ऐ दुनु शब्दमे "र" वर्ण आ ताहिसँ पहिले "अ" मात्रा आएल अछि मने "अर" तुकांत समान अछि। त' ई भेल एहि गजलक काफिया।
> काफिया छंदबद्ध गजलक आत्मा होइत अछि। एकरा एना बूझि सकैत छी जे बिना रदीफक गजल त' भ' सकैत अछि मुदा बिना कफियाक गजल संभव नहि। ओना बिना रदीफक गजल बेसी प्रचलित नै अछि मुदा एहन गजलकें "गैर-मुरद्दफ" गजल कहल जाइछ।
मकता:- गजलक अंतिम शेरकें मकता कहल जाएत अछि। ऐ अंतिम शेरमे (शेरक दुनु मेंसँ कोनो एकटा पांतिमे) गजलकार द्वारा अपन नाम/उपनाम प्रयोग करबाक प्रचलन अछि जे सभ गजलमे एक रहबाक चाही (मने फराक-फराक गजलमे नाम/उपनामक अदला-बदली नै करक चाही)
बहर:- बहर एकटा निश्चित वर्ण-क्रम होइत अछि। कोनो गजलक सभ शेरमे कोनो निश्चित वर्ण-क्रमक अनुपालनकें बहरयुक्त गजल कहल जाइत अछि।
मैथिलीमे बहर दू तरहक होइछ-
क) वर्णक आधार पर - सरल वार्णिक आ वार्णिक
ख) मात्राक आधार पर - मात्रिक
>"अनचिन्हार आखर" आ "विदेह"क माध्यमे मैथिली गजलमे "अरबी बहर"क सफलतापूर्वक आ चिक्कन प्रयोग भ' रहल अछि।
गजलक अलग-अलग बहर अछि जाहिमेसँ अरबी बहरके अंतर्राष्ट्रीय मानक मानल गेल अछि।
अरबीबहरमे बहरक तीन कोटि होइत अछि-
क) सामान
ख) अर्द्धसमान
ग) असमान
> आउ जानी अरबी बहरक एहि तीनू भेदक अलग-अलग उपभेद आ ओकर संरचना (मात्राक्रम)
क) समान बहर:-
१) बहरे हजज - १२२२
२) बहरे रमल - २१२२
३) बहरे कामिल - ११२१२
४) बहरे मुतकारिब - १२२
५) बहरे मुतदारिक - २१२
६) बहरे रजज - २२१२
७) बहरे वाफिर - १२११२
ख) अर्द्ध समान बहर:-
१) बहरे तवील - १२२+१२२२
२) बहरे मदीद - २१२२+२१२
३) बहरे बसीत - २२१२+२१२
४) बहरे मुजस्सम/मुजास - २२१२+२१२२
५) बहरे मुन्सरह - २२१२+२२२१
६) बहरे मजरिअ - १२२२+२१२२
७) बहरे मुक्तबिज - २२२१+२२१२
ग) असमान बहर:-
१) बहरे - २१२२+२२१२+२१२२
२) बहरे - २१२२+२१२२+२२१२
३) बहरे सरीअ - २२१२+२२१२+२१२२
४) बहरे करीब - १२२२+१२२२+२१२२
५) बहरे मुशाकिल - २१२२+१२२२+१२२२
६) बहरे कलीब - २१२२+२१२२+१२२२
७) बहरे असम - २१२२+१२२२+२१२२
८) बहरे कबीर - २२२१+२२२१+२२१२
९) बहरे सगीर - २२१२+२१२२+२२१२
१०) बहरे सरीम - १२२२+२१२२+२१२२
११) बहरे सलीम - २२१२+२२२१+२२२१
१२) बहरे हमीद - २२२१+२२१२+२२२१
१३) बहरे हमीम - २१२२+२२१२+२२१२
=> गजलक व्याकरणसँ सम्बंधित सम्पूर्ण आलेख पढ़बा लेल ऐ ठाम जाऊ - http://anchinharakharkolkata.blogspot.in/
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